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Sunday, June 28, 2020

Motivational story।। doctor kaise bane ek bhikharin

Story of bhikharin best motivational story in hindi

Doctor kyo nahi ban pate hai?

         
how to be a doctor
आज के जमाने मे किसका सपना नही होता है कि मै doctor नही बनू। हर पढने वाले student ये सोचते है की एक ना एक दिन मै doctor बन के दिखाऊगा। इसी वजह से वे science की पढाई करना शुरु कर देते है। एसे student doctor बनने के लिए पढाई के लिए दिन रात एक कर देते है। 
          परंतु किसी न किसी मजबुरी की वजह से उसकी पढाई वही रुक जाती है और परिवारिक परिस्थिती के कारण उसे कोई ना कोई job करने के लिए अथवा गरीब परिवार के student मजदूरी करने के लिए तैयार हो जाते है। ये तो सभी को पता है की परिवारीक परिस्थितीक तनाव चीन्ता मे डाल देते है।

तो चलिये देरी किये बिना ही हम आपको कहानी बताते है।

      how to be a doctor ।।  ek bhikharin?

          एक समय की बात है काशीपुर नाम के गाँव मे जगण नाम का एक भिखारी अपनी बेटी गौरी के साथ रहता था। गौरी की माँ को गाँव मे फैले महामारी के कारण देहांत हो गया था और जगण को कुछ दिखाई नही देता था, इसी वजह से उसे कही काम नही मिलता था और मजबूरन उसे भीख मांगने के लिए अपनी बेटी गौरी के साथ भीख मांगना पड़ता था।
          चुकी गौरी को भीक मांगना पसंद नही था। वह पढना लिखना चाहती थी। जब भी गौरी पिता के संग गाँव के सेठानी के घर भीख मांगने पहुचती तो वहा उनके बेटे राजू को पढ़ते लिखते देख उसे खुद के लिए बहुत बुरा लगता था और ये देख सेठानी ताने देते हुए बोलती:- "हरिया देख दरवाजे पर फिर से वही भिखारी होगा, खुछ भीख देकर उसे भगा जल्दी से, गाँव मे एक भी hospital नही है, और अगर इन मानहूसो की महामारी मेरे बेटे राजू को लग गई तो मै क्या करूंगी"।
            ये सुन दोनो दुखी होकर वहा से चले गये। तब गौरी ने कहा: "पिताजी सारा गाँव हमसे दूर क्यो भागते है? क्या हम बुरे लोग है?" इस बात पर पिताजी ने जवाब दिया: "अरे नही बेटी बुराई तो हमारी गरीबी और इनकी सोच मे है।
            पिताजी एक दिन मै डॉक्टर बनकर आपके आंखो का इलाज करूंगी। मै इस गाँव मे एक अस्पताल खोलूंगी।
            बेटी हमारे लिए तो दो वक्त की रोटि जुटाना ही बड़ा कठिन है। ये सब तो बड़े लोगो के सपने है। काश मै तुम्हारे लिए कुछ कर पाता।
            तब एक औरत ने गौरी के पास आयी और बोली: "अरे ओ गौरी अगर तुम हमारा toilet साफ कर दोगी तो मै तुम्हे कुछ रुपये भीख दूंगी"।
           toilet साफ कर दिया लेकिन गौरी को ये बात बहुत बुरी लगी। तभी गौरी ने फैसला कर ली की वो डॉक्टर बनेगी।
Doctor

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गौरी ने उनकी बात मानी और उनका
           गौरी ने अपने पिता को मन्दिर के बाहर रहीम चाचा के पास बैठा दिया और वो खुद कई दिनो तक खिलौने गाँव मे बेचकर पैसे कमाने लगे और फिर एक दिन गाँव की शिक्षिका रेणू madem से मिलकर वो गाँव सरकारी school मे पढने लगी।
           अब गौरी रोज school से आने के बाद खिलौना बेचती और पैसे कमाती और अपने पिता की देखभाल करती। गौरी रात रात भर जगकर पढाई किया करती। वो पढने मे बहुत मेहनत करती और हमेशा अच्छे अंको से पास होती। गौरी की हिम्मत और सफलता देख सेठानी और गाँव के अन्य लोग सभी हैरान थे और वो जगण और गौरी से जलने भी लगे थे। उनमे से एक ताना देकर बोली "पता नही ये भिखारीन पढलिखकर कौन-सा डॉक्टर बन जायेगी, मै भी देखती हू"।
           गौरी हर साल अच्छे अंको से पास होती और शिक्षिका रेणू भी गौरी की पढाई मे खुब मदद करती। धीरे-धीरे समय बितता गया और गौरी बड़ी होती गई। उसने अपनी मेहनत और लगन से अपनी school पढाई पूरी की और आगे doctor के पढाई पढने हेतू college मे दाखिला के लिए exam मे टॉप भी की, ये खबर सुनकर गौरी के पिता और शिक्षिका रेंंनू दोंनो बहुत खुस हुये।
          गौरी को आगे की पढाई के लिए उसे scholarship भी मिला। लेकिन गौरी डॉक्टर की पढाई करने के लिए शहर जाना था परंतु वे अपने पिता को छोडकर जाना नही चाहती थी इसलिये वो उदास हो गयी। तभी शिक्षिका रेणू ने कहा:- "गौरी तू फिक्र मत कर यहा सब मै सम्भल लुंगी, तू बस शहर जा और जल्दी से डॉक्टर बनकर आना।
          वह पढाई के लिए शहर चली गयी। गुजरते सपने के साथ वो अपनी सपनो की तरफ तेजी से कामयाबी के साथ बढ रही थी। कई दिनो तक उसकी कोई खोज खबर नही आयी।
           कुछ साल बाद गाँव मे बड़ा महामारी के बिमारी तेजी से फैलने लगी और रेणू के पिता सहित सेठानी और उसका बेटा राजू सभी बहुत बिमार हो गए और नगर के एक छोटे से सरकारी अस्पताल मे पड़े रहे, पर वहा काई दिनो से कोई डॉक्टर नही आया। सब बहुत दुखी और उदास, भगवान से जिन्दगी की प्रथना करने लगे। उसी समय तभी एक नर्स ने सभी को खबर दी "की अब तुमलोगो को चिंता करने की जरुरत नही है। आज सरकार की तरफ से शहर के सबसे बड़े डॉक्टर साहिबा आपका इलाज करने आने वली है" यह सुनकर गाँव वले बहुत खुश हुए।
           फिर hospital के सामने एक कार आकर रुकी, उसमे से एक डॉक्टर उतरी।
डॉक्टर साहिबा

अगर सरपंच ने उन्हे माला पहनाकर उनका स्वागत किया। जब वो अस्पताल के अन्दर आयी तो उसे देख सभी हैरान हो गये। क्योकी वो डॉक्टर कोई और नही बल्कि वही भिखरीन लडकी गौरी थी। गौरी ने अपने पिता के चरण स्पर्श किये और उनका आशीर्वाद लिया। उसके बाद सभी गाँव वालो का इलाज करना शुरु किया।
           गौरी के इलाज से ही कुछ दिनो मे सभी गाँववाले ठीक हो गये। गौरी ने अपने पिता की आंखो का operation करवाकर उनकी रोशनी भी वापस लायी।
           
आज गौरी की मेहनत, लगन और सफलता की वजह से ही एक बार फिर सारा गाँव महामारी से पूरी तरह से मुक्त हो गया और सेठानी सहित बाकी गाँव वालो को अपनी गलती का एहसास हो गया। वो सभी गौरी को फुल मालाओ का हार पहनकर उसका जय-जयकार करने लगे और ये देख गौरी के पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

Hints:- तो मेरे दोस्तो ये कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की अगर गौरी की तरह मेेेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय से किसी काम को किया जाय तो उसमे हमे कामयाबी जरुर मिलती है।

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